बोदल के गरना साहिब में श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी और हरियां वेलां में श्री गुरु हर राय साहिब जी के ऐतिहासिक संबंध जानें। यह सचित्र लेख स्थानीय धार्मिक परंपराएं समझाता है, स्मरण किए जाने वाले आगमन और जन्मस्थान को अलग रखता है तथा आगे पढ़ने के स्रोत देता है।
पावन यात्राएं, स्थायी स्मृतिस्थल
दो ऐतिहासिक गुरुद्वारे जिले के श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी और श्री गुरु हर राय साहिब जी से संबंध सहेजते हैं।

श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी
होशियारपुर से संबंध: दसूहा के निकट बोदल में गुरुद्वारा श्री गरना साहिब।
छठे सिख गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी बोदल के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल से जुड़े हैं। सिख ऐतिहासिक विवरण बताते हैं कि यहां आगमन पर गुरु साहिब गरना वृक्ष के नीचे विश्राम करने ठहरे। वृक्ष और गुरुद्वारे का नाम इस स्मृति को सहेजते हैं। जिला प्रशासन इसे होशियारपुर से लगभग 39 किलोमीटर दूर धार्मिक स्थल बताता है। संबंध स्मरण किए जाने वाले आगमन का है, जिले में जन्म का नहीं। यह स्थल क्षेत्र का सिख इतिहास जानने का ठोस अवसर देता है।
Sources: District Hoshiarpur: Garna Sahib; The Sikh Encyclopedia: Bodal.
श्री गुरु हर राय साहिब जी
होशियारपुर से संबंध: गुरुद्वारा हरियां वेलां, जिसे हरियां बेलां या हरियां वैलां भी लिखा जाता है।
सातवें सिख गुरु श्री गुरु हर राय साहिब जी के यहां आगमन की परंपरा हरियां वेलां में सहेजी गई है। सिख धर्म विश्वकोश बाबा परजापत द्वारा गुरु के घोड़ों के चारे के लिए बेलें लाने का स्थानीय वर्णन दर्ज करता है। इससे स्थान के नाम का धार्मिक स्मृति से संबंध समझ आता है। आशीर्वाद की कथाएं श्रद्धा परंपरा के संदर्भ में पढ़ी जानी चाहिए। हरियां वेलां के बाद के सिख ऐतिहासिक संबंध भी हैं, जो पीढ़ियों में जिले की धार्मिक विरासत जानने का आरंभ बनते हैं।
Sources: Punjabi University: Encyclopaedia of Sikhism, Harian Velan; Discover Sikhism: Harian Vellan Sahib.
